Monday, 30 March 2015

Hindi romantic poem:Kya ho tum kya ho tum

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क्या हो तुम ,क्या हो तुम मेरे जीवन में क्या हो तुम

मेरे जीने के मकसद सी तुम . सर्दी की मीठी धुप सी तुम ,गर्मी की ठंडी छाँव सी तुम
में इक्क आवारा  बादल सा जिसमे रहती बरसात सी तुम। क्या हो तुम क्या हो तुम-
मेरे जीवन में क्या हो तुम. में बिखरे हुए फूलो सा तोह उनसे बनता हुआ हार सी तुम
क्या हो तुम क्या हो तुम मेरे जीवन में क्या हो तुम में प्यासी पड़ी धरती सा तो सावन
की पहली बरसात सी तुम। में इक्क कोरे कागज़ सा तो उसपे उकेरे सुन्दर से बोल सी तुम
में रोते हुए बच्चे सा तोह उसकी भोली मुस्कान सी तुम। में इक्क चँचल भवरे सा तो इक्क
खिलते हुए सुन्दर से फूल सी तुम. और क्या बताऊँ क्या हो तुम मेरे जीवन में क्या हो तुम

हर सुबह जब तुम आती हो मेरे लिये खुशियाँ लाती हो। हर शाम को जब तुम जाती हो अपनी यादें
छोड़े जाती हो  हर सुबह मिलने की उम्मीद हर शाम बिछड़ने की तकलीफ बस यही हमारा रिश्र्ता है
कुछ खट्टा हैं कुछ मीठा हैं बस रब्ब से यही अरदास रहे तेरे और मेरा साथ रहे-२।


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